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आरक्षण खैरात या अधिकार?

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#jaybhim_boys_girls_shoutout #poonapact #communalaward1932 #reservations #आरक्षण_खैरात_या_अधिकार? -.-.-.-.-.-.-.-.-.-.-.-.-.-.-.-. आरक्षण खैरात या अधिकार? भारत एक ऐसा देश जहाँ भिन्न भिन्न संस्कृति, धर्म, संप्रदाय के लोग रहते है। यहाँ विविधता में एकता देखने को मिलती है लेकिन इन एकता में जब बात आती है समानता की, शिक्षा की या समान अधिकार पाने की तो यहाँ एक समुदाय को नजरअंदाज किया जाता है, जिनके साथ रोटी या बेटी व्यवहार तो ठीक लेकिन उनको साथ में बैठने भी नहीं दिया जाता है। महाभारत रामायण काल से यहाँ हिन्दू धर्म के चौथे वर्ण के साथ धार्मिक,सांस्कृतिक और सामाजिक असमानता और दुर्व्यवहार किया जाता हैं। हजारों सालों से शुद्र मंदिर में वर्जित है, आज भी भारत के कई अंदरूनी गाँवो में एक समुदाय के साथ मानवता को शर्मशार करे ऐसी भेदभाव और तिरस्कार भरी नजरों से देखा जाता हैं। धर्म के नाम पर यहाँ एक समुदाय को शिक्षा और अधिकारों से कोसो दुर रखा गया था। लेकिन इस देश में जब ब्रिटिश हुकमरान आए तो उसने इस समाज के लिए शिक्षा के द्वार खोले। आरक्षण न दान है और न ही अनुदान। आरक्षण न भीख है और न ही ख़ैरात। आरक्षण न दया है और न ही कोई एहसान। आरक्षण हमारा संवैधानिक अधिकार है, जो इस देश के शोषित वंचित समाज को राष्ट्र की मुख्य धारा से जोड़ने का एक जरिया है। आरक्षण किस वजह से दिया गया, क्या आरक्षण माँगा गया था? भारत रत्न डॉ बाबासाहेब आम्बेडकरजी ने दुसरी गोलमेज परिषद (Round Table Talk)में भारत में हो रहे दलितों की अवमानना ओर उनको शिक्षा और राजनीतिसे अलग रखा गया है इस बारे में एक पत्र में दलितों के हक और उनके लिए राजकीय माँगे रखी थी जिसको 16 अगस्त 1932 को ब्रिटिश प्रधानमंत्री रेम्से मैक्डोनल्ड (Ramsay MacDonald) ने साम्र्पदायिक पंचाट (Communal Award) की घोषणा की जिसमें दलितो सहित 11 समुदायों को पृथक निर्वाचक मंडल प्रदान किया गया। जिसके तहत बाबासाहेब द्वारा उठाई गई राजनीतिक प्रतिनिधित्व की माँग को मानते हुए दलित वर्ग को दो वोटों का अधिकार मिला। एक वोट से दलित अपना प्रतिनिधि चुनेंगे तथा दूसरी वोट से सामान्य वर्ग का प्रतिनिधि चुनेंगे। इस प्रकार दलित प्रतिनिधि केवल दलितों की ही वोट से चुना जाना था। दूसरे शब्दों में उम्मीदवार भी दलित वर्ग का तथा मतदाता भी केवल दलित वर्ग के ही। साम्प्रदायिक पंचाट(Communal Award) की जब घोषणा की गई तब गांधी इस समय पूना की येरवडा जेल में थै और उसने इस एवोर्ड में बदलाव करने का प्रधानमंत्री मैक्डोनल्ड को पत्र लिखा। @jaybhim_boys_girls_shoutout #कमेन्ट में पढ़े⤵

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