धर्म

बाबासाहेब ने बुद्ध धम्म ही क्यों ग्रहण किया ?

समाज को जिस अमानवीय बेड़ियों में जकड़ा हुआ था मनु शास्त्र, उस शास्त्र में त्रुटियां थीं इसकी बारीकियों को समझने के लिए डॉ आंबेडकर को 25 वर्ष का समय क्यों लगा कारण साफ है समाज को बाबासाहेब के बाद कोई दिक्कत परेशानी न हो इसलिए विश्व के सभी धर्मों का अध्ययन भी किये ।

उसके बाद ही बुद्ध धम्म अपनाने का ऐलान किया, जिससे सभी धर्म के ठीकेदार के कान खड़े हो गए। बाबासाहेब का मेहनत देखकर सभी धर्मावलंबी चाहते थे कि अम्बेडकर उनका धर्म ग्रहण करें इसका मतलब साफ है कि बाबासाहेब के साथ ग्रासरूट के लोग जुड़े थे, सभी धर्मावलम्बियों ने दूर की सोचकर ही धर्म ग्रहण के लिए ऑफर दिया होगा, जिन धर्मावलम्बियों ने ऑफर दिया उन्होंने बाबासाहेब को समझा ही नहीं था। जो व्यक्ति अकेले अंग्रेजों को समझाने में सफल हो गए और कामयाब होकर सामुदायिक पुरष्कार लेकर भारत लौटे, ऐसे महान व्यक्ति को धर्म की लालच, बड़ी सोचनीय स्थिति थी अन्य धर्मों के धर्मावलम्बियों की, जब डॉ. अम्बेडकर ने उन सभी के ऑफर इनकार कर दिए तब सभी धर्म के धर्मावलम्बियों ने गलत प्रचार का रास्ता अपना कर समाज को गुमराह करने की ठान ली।


लेकिन उस समाज को क्या हुआ है जिनके लिए अम्बेडकर समाज को बचाने के लिए खुद को पग पग पर लुटाते रहे। क्या हुए है इस समाज को जो डॉ आंबेडकर को समझने में 73 वर्ष भी उनके लिए कम पड़ गये। इसका एक मात्र कारण है संविधान की पढ़ाई स्कूलों में नहीं करवाना। अब लोगों को यह समझना होगा कि जिस संविधान से लायक हो या नालायक

MP,MLA,PM,CM,DM,IAS,IPS आदि बन रहे हैं वह दस्तावेज कितना महत्वपूर्ण है जिसे बचाना हम सबका फर्ज है। संविधान बचेगा तो धर्म बचेगा क्योंकि धर्म की स्वतंत्रता का हक़ संविधान में दिया गया इस लिए बेहतर यही होगा कि 🔕बजाना छोड़ो , संविधान अपनाओ और अपना धम्म बचाओ।

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